श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  5.140.4-5 
संजय उवाच
आनुपूर्व्येण वाक्यानि तीक्ष्णानि च मृदूनि च।
प्रियाणि धर्मयुक्तानि सत्यानि च हितानि च॥ ४॥
हृदयग्रहणीयानि राधेयं मधुसूदन:।
यान्यब्रवीदमेयात्मा तानि मे शृणु भारत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
संजय बोले - भारत! अतुलित रूप वाले मधुसूदन श्रीकृष्ण ने राधानन्दन कर्ण से जो तीक्ष्ण, मधुर, प्रिय, धर्मयुक्त, सत्य, हितकारी और हृदय को प्रसन्न करने वाली बातें क्रमशः कहीं थीं, उन्हें मुझसे सुनो॥4-5॥
 
Sanjay said – India! Please listen to me from me all the sharp, sweet, dear, religious, true, beneficial and heart-pleasing things that Madhusudan Shri Krishna, who was incommensurable form, had said to Radhanandan Karna respectively. 4-5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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