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mahabharat 5.140.28: हे कुन्तीपुत्र! जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा रहता है, उसी प्रकार तुम भी अपने भाइयों सहित राज्य का पालन करो और कुन्ती को प्रसन्न करो। 28.   |   mahabharat अध्याय 5.140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.140.28 
स त्वं परिवृत: पार्थैर्नक्षत्रैरिव चन्द्रमा:।
प्रशाधि राज्यं कौन्तेय कुन्तीं च प्रतिनन्दय॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जैसे चन्द्रमा तारों से घिरा रहता है, उसी प्रकार तुम भी अपने भाइयों सहित राज्य का पालन करो और कुन्ती को प्रसन्न करो। 28.
 
O son of Kunti, like the moon surrounded by stars, you, along with your other brothers, should take care of the kingdom and make Kunti happy. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)