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mahabharat 5.140.25: हे महाबाहो! अपने पाण्डव भाइयों के साथ राज्य का आनन्द लो। जप, हवन तथा विविध शुभ कर्मों में संलग्न रहो॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 5.140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.140.25 
भुङ्क्ष्व राज्यं महाबाहो भ्रातृभि: सह पाण्डवै:।
जपैर्होमैश्च संयुक्तो मङ्गलैश्च पृथग्विधै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहो! अपने पाण्डव भाइयों के साथ राज्य का आनन्द लो। जप, हवन तथा विविध शुभ कर्मों में संलग्न रहो॥ 25॥
 
O mighty-armed one! Enjoy the kingdom along with your Pandava brothers. Engage in chanting, performing oblations and various auspicious deeds.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)