श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 140: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.140.16-17h 
अग्निं जुहोतु वै धौम्य: संशितात्मा द्विजोत्तम:।
अद्य त्वामभिषिञ्चन्तु चातुर्वैद्या द्विजातय:॥ १६॥
पुरोहित: पाण्डवानां ब्रह्मकर्मण्यवस्थित:।
 
 
अनुवाद
द्विजों में श्रेष्ठ धौम्य जी शुद्ध हृदय से आज तुम्हारे लिए होम करें तथा चारों वेदों के विद्वान् ब्राह्मण तथा ब्राह्मण-योग्य धर्म का पालन करने वाले पाण्डवों के पुरोहित धौम्य जी भी तुम्हारा अभिषेक करें। 16 1/2॥
 
Dhaumya, the best of the Dwijas, having a pure heart, should perform the 'Homa' for you today, and may Dhaumyaji, a Brahmin scholar of the four Vedas and the priest of the Pandavas who always follow the Brahmin-appropriate religion, also anoint you. 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)