Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.140.1-2: धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! जब राजपुत्रों और सेवकों से घिरे हुए, शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले, अनुपम रूपधारी भगवान श्रीकृष्ण, राधानन्दन कर्ण को रथ पर बिठाकर हस्तिनापुर से बाहर चले गए, तब उन्होंने उससे क्या कहा? गोविन्द ने सूतपुत्र कर्ण को क्या सान्त्वनाएँ दीं? | mahabharat अध्याय 5.140: भगवान् श्रीकृष्णका कर्णको पाण्डवपक्षमें आ जानेके लिये समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! जब राजपुत्रों और सेवकों से घिरे हुए, शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले, अनुपम रूपधारी भगवान श्रीकृष्ण, राधानन्दन कर्ण को रथ पर बिठाकर हस्तिनापुर से बाहर चले गए, तब उन्होंने उससे क्या कहा? गोविन्द ने सूतपुत्र कर्ण को क्या सान्त्वनाएँ दीं?
Dhritarashtra asked- Sanjay! When Lord Shri Krishna, surrounded by royal sons and servants, the destroyer of enemy warriors, in an incomparable form, placed Radhanandan Karna on the chariot and went out of Hastinapur, what did he say to him? What consolations did Govinda give to Karna, the son of Suta?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥