श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 14: उपश्रुति देवीकी सहायतासे इन्द्राणीकी इन्द्रसे भेंट  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  5.14.6-7 
देवारण्यान्यतिक्रम्य पर्वतांश्च बहूंस्तत:।
हिमवन्तमतिक्रम्य उत्तरं पार्श्वमागमत्॥ ६॥
समुद्रं च समासाद्य बहुयोजनविस्तृतम्।
आससाद महाद्वीपं नानाद्रुमलतावृतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
देवताओं के अनेक वनों, अनेक पर्वतों और हिमालय को पार करती हुई देवी उपश्रुति उसके उत्तरी भाग में पहुँचीं। तत्पश्चात् अनेक योजन तक फैले समुद्र तक पहुँचकर उन्होंने एक ऐसे महाद्वीप में प्रवेश किया जो नाना प्रकार के वृक्षों और लताओं से सुशोभित था।
 
Crossing numerous forests of the gods, many mountains and the Himalayas, Goddess Upashruti reached its northern part. Thereafter, reaching the sea that extended for many yojanas, she entered a continent that was decorated with various types of trees and creepers. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)