श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 14: उपश्रुति देवीकी सहायतासे इन्द्राणीकी इन्द्रसे भेंट  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.14.3 
उपश्रुतिरुवाच
उपश्रुतिरहं देवि तवान्तिकमुपागता।
दर्शनं चैव सम्प्राप्ता तव सत्येन भाविनि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उपश्रुति ने कहा - देवी! मैं उपश्रुति हूँ और आपके पास आया हूँ। भामिनी! आपकी सत्यनिष्ठा से प्रभावित होकर मैं आपके समक्ष प्रकट हुआ हूँ॥3॥
 
Upashruti said - Devi! I am Upashruti and I have come to you. Bhamini! Impressed by your truthfulness, I have appeared before you.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)