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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 14: उपश्रुति देवीकी सहायतासे इन्द्राणीकी इन्द्रसे भेंट
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श्लोक 17
श्लोक
5.14.17
एतेन चाहं सम्प्राप्ता द्रुतं शक्र तवान्तिकम्।
जहि रौद्रं महाबाहो नहुषं पापनिश्चयम्॥ १७॥
अनुवाद
हे महाबाहु इन्द्र! इसीलिए मैं बड़ी उतावली से आपके पास आया हूँ। आप उस पापमय विचार वाले भयंकर नहुष का वध कर दीजिए॥17॥
O mighty-armed Indra! That is why I have come to you in great haste. Please kill that terrible Nahusha who has sinful thoughts.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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