पद्मस्य भित्त्वा नालं च विवेश सहिता तया।
बिसतन्तुप्रविष्टं च तत्रापश्यच्छतक्रतुम्॥ ११॥
अनुवाद
उपश्रुति देवी उस कमल-दंड को तोड़कर इन्द्राणी के साथ उस कमल के भीतर प्रविष्ट हो गईं और वहाँ एक तंतु में प्रविष्ट होकर छिपे हुए शतक्रतु इन्द्र को देखा॥11॥
Upashruti Devi broke that lotus stem and entered inside that lotus along with Indrani and there, entering into one of the threads, saw the hidden Shatkratu Indra. 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥