Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.139.7: जैसे यज्ञ में आने वाला मूर्ख ब्राह्मण सम्मान नहीं पाता, वैसे ही जो अमित्र, दुर्बुद्धि, नास्तिक, कुटिल और कपटी है, वह सज्जनों के बीच कभी सम्मान नहीं पाता॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.139.7 
मित्रध्रुग् दुष्टभावश्च नास्तिकोऽथानृजु: शठ:।
न सत्सु लभते पूजां यज्ञे मूर्ख इवागत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे यज्ञ में आने वाला मूर्ख ब्राह्मण सम्मान नहीं पाता, वैसे ही जो अमित्र, दुर्बुद्धि, नास्तिक, कुटिल और कपटी है, वह सज्जनों के बीच कभी सम्मान नहीं पाता॥7॥
 
Just as a foolish Brahmin who comes to a yagya does not get respect, in the same way, one who is unfriendly, ill-willed, atheist, crooked and deceitful never gets respect among good men. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)