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mahabharat 5.139.4: द्रोणाचार्य बोले - राजन् ! मैं अपने पुत्र अश्वत्थामा से भी अधिक अर्जुन का आदर करता हूँ। कपिध्वज अर्जुन मेरे प्रति बड़ी विनम्रता रखता है ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.139.4 
द्रोण उवाच
अश्वत्थाम्नि यथा पुत्रे भूयो मम धनंजये।
बहुमान: परो राजन् संनतिश्च कपिध्वजे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - राजन् ! मैं अपने पुत्र अश्वत्थामा से भी अधिक अर्जुन का आदर करता हूँ। कपिध्वज अर्जुन मेरे प्रति बड़ी विनम्रता रखता है ॥4॥
 
Dronacharya said – King! I have more respect for Arjun than I have for my son Ashwatthama. Kapidhwaja Arjuna has great politeness towards me. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)