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mahabharat 5.139.21: जब तुम्हारे बहुत से मित्र क्लेशरूपी समुद्र में डूब रहे हों, तो उनका हित चाहने वाले मित्र का कर्तव्य है कि उस अवसर पर उनसे कुछ कहे। यद्यपि यह बात पहले भी कही जा चुकी है, तथापि मैं इसे फिर कहता हूँ।॥21॥   |   mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.139.21 
पुनरुक्तं च वक्ष्यामि यत् कार्यं भूतिमिच्छता।
सुहृदा मज्जमानेषु सुहृत्सु व्यसनार्णवे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब तुम्हारे बहुत से मित्र क्लेशरूपी समुद्र में डूब रहे हों, तो उनका हित चाहने वाले मित्र का कर्तव्य है कि उस अवसर पर उनसे कुछ कहे। यद्यपि यह बात पहले भी कही जा चुकी है, तथापि मैं इसे फिर कहता हूँ।॥21॥
 
When many of your friends are drowning in the sea of ​​trouble, it is the duty of a friend who wishes for their welfare to say something to them on that occasion. Although it has been said before, I will say it again. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)