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mahabharat 5.139.17: परंतु पाण्डवों से युद्ध करने का निश्चय करके तुम सुख, राज्य, मित्र और धन-सम्पत्ति सब कुछ खो दोगे और महान संकट में पड़ोगे ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.139.17 
त्वं तु हित्वा सुखं राज्यं मित्राणि च धनानि च।
विग्रहं पाण्डवै: कृत्वा महद् व्यसनमाप्स्यसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
परंतु पाण्डवों से युद्ध करने का निश्चय करके तुम सुख, राज्य, मित्र और धन-सम्पत्ति सब कुछ खो दोगे और महान संकट में पड़ोगे ॥17॥
 
But by deciding to fight the Pandavas, you will lose everything - happiness, kingdom, friends and wealth - and you will be in great trouble. ॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)