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mahabharat 5.139.11: जैसे कोई मूर्ख व्यक्ति वर्षा ऋतु में मगरमच्छों, घड़ियालों तथा अन्य जलचरों से भरी हुई वेगवती गंगा नदी को अपनी दोनों भुजाओं से तैरकर पार करने का प्रयत्न करता है, उसी प्रकार तुम भी यह सोचकर कि मुझमें बल है, पाण्डव सेना को अचानक पार कर जाना चाहते हो।   |   mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.139.11 
अस्ति मे बलमित्येव सहसा त्वं तितीर्षसि।
सग्राहनक्रमकरं गङ्गावेगमिवोष्णगे॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जैसे कोई मूर्ख व्यक्ति वर्षा ऋतु में मगरमच्छों, घड़ियालों तथा अन्य जलचरों से भरी हुई वेगवती गंगा नदी को अपनी दोनों भुजाओं से तैरकर पार करने का प्रयत्न करता है, उसी प्रकार तुम भी यह सोचकर कि मुझमें बल है, पाण्डव सेना को अचानक पार कर जाना चाहते हो।
 
Just as an unwise man tries to swim across the swift river Ganges during the rainy season, which is filled with crocodiles, alligators and other aquatic animals, with his two arms, in the same way you, thinking that I have the strength, want to suddenly cross over the Pandava army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)