Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.139.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्म और द्रोणाचार्य के ऐसा कहने पर दुर्योधन दुःखी हो गया। उसने टेढ़ी आँखों से उनकी ओर देखा और भौंहें सिकोड़कर अपना मुख नीचा कर लिया। उसने उनसे कुछ नहीं कहा॥1॥ | mahabharat अध्याय 5.139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तस्तु विमनास्तिर्यग्दृष्टिरधोमुख:।
संहत्य च भ्रुवोर्मध्यं न किंचिद् व्याजहार ह॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्म और द्रोणाचार्य के ऐसा कहने पर दुर्योधन दुःखी हो गया। उसने टेढ़ी आँखों से उनकी ओर देखा और भौंहें सिकोड़कर अपना मुख नीचा कर लिया। उसने उनसे कुछ नहीं कहा॥1॥
Vaishampayana says - Janamejaya! Duryodhan became saddened when Bhishma and Dronacharya said this. He looked at them with crooked eyes and lowered his face by contracting his eyebrows. He did not say anything to them.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥