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mahabharat 5.138.9-10h: घोष यात्रा के समय कर्ण आदि योद्धा आपके साथ थे। आप स्वयं रथ और कवच आदि से सुसज्जित थे, तथापि अर्जुन ने ही आपको गंधर्वों के हाथों से मुक्त कराया था। उनकी शक्ति समझने के लिए यह उदाहरण पर्याप्त होगा। अतः भरतश्रेष्ठ! आप अपने ही भाई पांडवों से संधि कर लीजिए। 9 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  5.138.9-10h 
कर्णप्रभृतयश्चेमे त्वं चापि कवची रथी।
मोक्षितो घोषयात्रायां पर्याप्तं तन्निदर्शनम्॥ ९॥
प्रशाम्य भरतश्रेष्ठ भ्रातृभि: सह पाण्डवै:।
 
 
अनुवाद
घोष यात्रा के समय कर्ण आदि योद्धा आपके साथ थे। आप स्वयं रथ और कवच आदि से सुसज्जित थे, तथापि अर्जुन ने ही आपको गंधर्वों के हाथों से मुक्त कराया था। उनकी शक्ति समझने के लिए यह उदाहरण पर्याप्त होगा। अतः भरतश्रेष्ठ! आप अपने ही भाई पांडवों से संधि कर लीजिए। 9 1/2॥
 
At the time of Ghosha Yatra, these warriors like Karna were with you. You yourself were equipped with chariot and armor etc., however, it was Arjun who freed you from the hands of Gandharvas. This example will be enough to understand their power. Hence Bharatshrestha! You make a treaty with your own brothers Pandavas. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)