Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.138.5-6: अब जब युधिष्ठिर ने अस्त्रविद्या में निपुण अर्जुन को, युद्ध के लिए दृढ़ संकल्पित भीमसेन को, गाण्डीव धनुष, अक्षय बाणों से भरे हुए दो तरकश, दिव्य रथ और ध्वजा को, युद्ध के लिए उद्यत बल और पराक्रम से युक्त नकुल और सहदेव को देखा है, तथा भगवान श्रीकृष्ण को भी सहायता के लिए पाकर तुम्हारे पिछले अपराधों को क्षमा नहीं किया है। | mahabharat अध्याय 5.138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतास्त्रं ह्यर्जुनं प्राप्य भीमं च कृतनिश्चयम्।
गाण्डीवं चेषुधी चैव रथं च ध्वजमेव च॥ ५॥
नकुलं सहदेवं च बलवीर्यसमन्वितौ।
सहायं वासुदेवं च न क्षंस्यति युधिष्ठिर:॥ ६॥
अनुवाद
अब जब युधिष्ठिर ने अस्त्रविद्या में निपुण अर्जुन को, युद्ध के लिए दृढ़ संकल्पित भीमसेन को, गाण्डीव धनुष, अक्षय बाणों से भरे हुए दो तरकश, दिव्य रथ और ध्वजा को, युद्ध के लिए उद्यत बल और पराक्रम से युक्त नकुल और सहदेव को देखा है, तथा भगवान श्रीकृष्ण को भी सहायता के लिए पाकर तुम्हारे पिछले अपराधों को क्षमा नहीं किया है।
‘Now having found Arjuna, well versed in the knowledge of weapons, and Bhimasena, who was determined to fight, having got hold of the Gandiva bow, two quivers full of inexhaustible arrows, a divine chariot and a flag, having seen Nakula and Sahadeva, who were full of strength and valour, ready for the war, and having also got Lord Krishna to help him, Yudhishthira will not forgive your previous offences.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥