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mahabharat 5.138.27: यदि हमारे ये वचन तुम्हें विपरीत प्रतीत हों, तो जब तुम युद्ध में गर्जते हुए भीमसेन की प्रबल गर्जना और अर्जुन के गाण्डीव धनुष की टंकार सुनोगे, तब तुम्हें ये वचन याद आएँगे।   |   mahabharat अध्याय 5.138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.138.27 
भीमस्य च महानादं नदत: शुष्मिणो रणे।
श्रुत्वा स्मर्तासि मे वाक्यं गाण्डीवस्य च नि:स्वनम्।
यद्येतदपसव्यं ते वचो मम भविष्यति॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यदि हमारे ये वचन तुम्हें विपरीत प्रतीत हों, तो जब तुम युद्ध में गर्जते हुए भीमसेन की प्रबल गर्जना और अर्जुन के गाण्डीव धनुष की टंकार सुनोगे, तब तुम्हें ये वचन याद आएँगे।
 
If these words of ours seem contrary to you, then when you hear the mighty roar of Bhimasena roaring in battle and the twang of Arjuna's Gandiva bow, then you will remember these words.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि भीष्मद्रोणवाक्ये अष्टात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें भीष्म-द्रोण-वाक्यविषयक एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)