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mahabharat 5.138.17: अश्विनीकुमारों के पुत्र नकुल-सहदेव, जिनका रूप इस पृथ्वी पर कहीं भी अतुलनीय है, वे गुरु के समान प्रेम और आदर के साथ आपकी सेवा में उपस्थित रहें॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.138.17 
आश्विनेयौ नरव्याघ्रौ रूपेणाप्रतिमौ भुवि।
तौ च त्वां गुरुवत् प्रेम्णा पूजया प्रत्युदीयताम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अश्विनीकुमारों के पुत्र नकुल-सहदेव, जिनका रूप इस पृथ्वी पर कहीं भी अतुलनीय है, वे गुरु के समान प्रेम और आदर के साथ आपकी सेवा में उपस्थित रहें॥17॥
 
May Nakul-Sahdev, the son of the Ashvinikumars, whose form has no comparison anywhere on this earth, be present in your service with the love and respect of a Guru for you. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)