Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.137.9-10: मैं उस महान धर्म को नमस्कार करता हूँ, क्योंकि धर्म ही समस्त लोकों का पालन करता है। तुम जाकर अर्जुन से तथा युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भीमसेन से कहो - 'जिसके लिए क्षत्राणी पुत्र उत्पन्न करती है, उसके लिए यही उचित समय है। श्रेष्ठ पुरुष किसी से शत्रुता होने पर भी उत्साह नहीं खोते।'॥9-10॥ | mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उस महान धर्म को नमस्कार करता हूँ, क्योंकि धर्म ही समस्त लोकों का पालन करता है। तुम जाकर अर्जुन से तथा युद्ध के लिए सदैव तत्पर रहने वाले भीमसेन से कहो - 'जिसके लिए क्षत्राणी पुत्र उत्पन्न करती है, उसके लिए यही उचित समय है। श्रेष्ठ पुरुष किसी से शत्रुता होने पर भी उत्साह नहीं खोते।'॥9-10॥
I salute that great Dharma, because it is Dharma that sustains all the people. You go and tell Arjuna and also Bhimasena who is always ready for war - 'This is the right time for the one for whom a Kshatrani gives birth to a son. Noble men do not lose enthusiasm even after having enmity with someone.'॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥