Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.137.7: दशार्हकुलनन्दन श्रीकृष्ण! आकाशवाणी ने जो कुछ कहा है, वैसा ही घटित हो, यही मेरी भी इच्छा है। वृष्णिनन्दन! यदि धर्म का अस्तित्व है, तो यह सब उसी रूप में सत्य होगा। | mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा तदस्तु दाशार्ह यथा वागभ्यभाषत।
धर्मश्चेदस्ति वार्ष्णेय तथा सत्यं भविष्यति॥ ७॥
अनुवाद
दशार्हकुलनन्दन श्रीकृष्ण! आकाशवाणी ने जो कुछ कहा है, वैसा ही घटित हो, यही मेरी भी इच्छा है। वृष्णिनन्दन! यदि धर्म का अस्तित्व है, तो यह सब उसी रूप में सत्य होगा।
Dasharhakulanandan Sri Krishna! Whatever the voice from the sky has said, it should happen the same way, this is my wish too. Vrishninandan! If Dharma exists, then all this will be true in the same form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥