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mahabharat 5.137.32: वे तीव्र गति से चलने वाले गरुड़ के समान उस विशाल पथ को शीघ्रतापूर्वक पार करके धनुष-बाण धारण करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को उपप्लव्य नगरी में ले गए॥32॥   |   mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  5.137.32 
ते व्यतीत्य महाध्वानं क्षिप्रं श्येना इवाशुगा:।
उच्चैर्जग्मुरुपप्लव्यं शार्ङ्गधन्वानमावहन्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वे तीव्र गति से चलने वाले गरुड़ के समान उस विशाल पथ को शीघ्रतापूर्वक पार करके धनुष-बाण धारण करने वाले भगवान श्रीकृष्ण को उपप्लव्य नगरी में ले गए॥32॥
 
Like a fast-moving eagle, he quickly covered that huge path and took Lord Krishna, wielding the bow and arrow, to the city of Upplavya. 32॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि कुन्तीवाक्ये सप्तत्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें कुन्तीवाक्यविषयक एक सौ सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)