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mahabharat 5.137.31: दारुक द्वारा चलाये जाने वाले वे महान घोड़े मन और वायु के समान तीव्र गति से आकाश को पी जाते थे।   |   mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.137.31 
ते पिबन्त इवाकाशं दारुकेण प्रचोदिता:।
हया जग्मुर्महावेगा मनोमारुतरंहस:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
दारुक द्वारा चलाये जाने वाले वे महान घोड़े मन और वायु के समान तीव्र गति से आकाश को पी जाते थे।
 
Driven by Daruka, those great horses moved as fast as the mind and the wind, drinking up the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)