श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.137.25 
वैशम्पायन उवाच
अभिवाद्याथ तां कृष्ण: कृत्वा चापि प्रदक्षिणम्।
निश्चक्राम महाबाहु: सिंहखेलगतिस्तत:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात महाबाहु श्रीकृष्ण ने कुन्तीदेवी को प्रणाम करके उनकी प्रदक्षिणा की और सिंह के समान मनोहर चाल से वहाँ से चले गये॥25॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Thereafter, the mighty-armed Shri Krishna paid obeisance to Kuntidevi and circumambulated her and then left the place with a graceful gait like a lion. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)