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mahabharat 5.137.23-24: जनार्दन! मेरी ओर से आप द्रौपदी तथा पाण्डवों का उनके पुत्रों सहित कुशलक्षेम पूछिए और फिर मुझे बताइए कि वे भी सकुशल हैं। जाइए, आपकी यात्रा मंगलमय हो, मेरे पुत्रों की रक्षा कीजिए।॥ 23-24॥   |   mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  5.137.23-24 
पाण्डवान् कुशलं पृच्छे: सपुत्रान् कृष्णया सह॥ २३॥
मां च कुशलिनीं ब्रूयास्तेषु भूयो जनार्दन।
अरिष्टं गच्छ पन्थानं पुत्रान् मे प्रतिपालय॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! मेरी ओर से आप द्रौपदी तथा पाण्डवों का उनके पुत्रों सहित कुशलक्षेम पूछिए और फिर मुझे बताइए कि वे भी सकुशल हैं। जाइए, आपकी यात्रा मंगलमय हो, मेरे पुत्रों की रक्षा कीजिए।॥ 23-24॥
 
Janardan! On my behalf, ask about the well-being of Draupadi and the Pandavas along with their sons and then inform me that they are also safe. Go, may your journey be auspicious, protect my sons.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)