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mahabharat 5.137.16: पाण्डवों! सब प्रकार से धर्म को बढ़ाने वाले आप सबके सामने ही पांचाल की राजकुमारी द्रौपदी के प्रति कहे गए कठोर वचनों को कौन वीर क्षमा कर सकता है?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.137.16 
यच्च व: प्रेक्षमाणानां सर्वधर्मोपचायिनाम्।
पाञ्चाली परुषाण्युक्ता को नु तत् क्षन्तुमर्हति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों! सब प्रकार से धर्म को बढ़ाने वाले आप सबके सामने ही पांचाल की राजकुमारी द्रौपदी के प्रति कहे गए कठोर वचनों को कौन वीर क्षमा कर सकता है?॥16॥
 
Pandavas! Which brave person can forgive the harsh words spoken to the princess of Panchala, Draupadi, in front of all of you, who are promoting virtue in every way?'॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)