श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.137.11 
विदिता ते सदा बुद्धिर्भीमस्य न स शाम्यति।
यावदन्तं न कुरुते शत्रूणां शत्रुकर्शन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले श्रीकृष्ण! आप भीमसेन के इरादे हमेशा से जानते हैं। जब तक वह अपने सभी शत्रुओं का वध नहीं कर लेता, तब तक उसे चैन नहीं मिलेगा ॥11॥
 
O destroyer of enemies, Sri Krishna! You have always known the intentions of Bhimasena. He will not be at peace until he kills all his enemies. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)