श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  5.137.1-2 
कुन्त्युवाच
अर्जुनं केशव ब्रूयास्त्वयि जाते स्म सूतके।
उपोपविष्टा नारीभिराश्रमे परिवारिता॥ १॥
अथान्तरिक्षे वागासीद् दिव्यरूपा मनोरमा।
सहस्राक्षसम: कुन्ति भविष्यत्येष ते सुत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
कुन्ती बोली - केशव! तुम जाकर अर्जुन से कहो कि तुम्हारे जन्म के समय जब मैं स्त्रियों से घिरी हुई आश्रम के प्रसूतिगृह में बैठी थी, उसी समय आकाश से यह दिव्य एवं सुन्दर वाणी सुनाई दी - 'कुन्ती! तुम्हारा यह पुत्र इन्द्र के समान पराक्रमी होगा।॥1-2॥
 
Kunti said - Keshav! You go and tell Arjun that at the time of your birth when I was sitting in the delivery room of the ashram surrounded by women, at that very time this divine and beautiful voice was heard from the sky - 'Kunti! This son of yours will be as valiant as Indra.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)