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mahabharat 5.136.4: जो लोग बहुत मित्रवत होते हैं, वे ही संकट के समय राजा के साथ रहते हैं; परन्तु बछड़ों के साथ बंधी हुई गायों के समान वे भी अपनी असमर्थता के कारण कुछ नहीं कर पाते; वे केवल मन ही मन उसकी भलाई की प्रार्थना करते रहते हैं॥4॥   |   mahabharat अध्याय 5.136: विदुलाके उपदेशसे उसके पुत्रका युद्धके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 136: विदुलाके उपदेशसे उसके पुत्रका युद्धके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.136.4 
य एवात्यन्तसुहृदस्त एनं पर्युपासते।
अशक्तय: स्वस्तिकामा बद्धवत्सा इडा इव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग बहुत मित्रवत होते हैं, वे ही संकट के समय राजा के साथ रहते हैं; परन्तु बछड़ों के साथ बंधी हुई गायों के समान वे भी अपनी असमर्थता के कारण कुछ नहीं कर पाते; वे केवल मन ही मन उसकी भलाई की प्रार्थना करते रहते हैं॥4॥
 
Only those people who are very friendly remain with the king in times of crisis; but like cows tied with their calves, they too are unable to do anything because of their inability; they only keep praying for his well-being in their minds. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)