ऐसा सुनकर प्रत्येक क्षत्रिय स्त्री ज्ञानवान, साहसी, दानी, तपस्वी, ब्राह्मी सौन्दर्य से युक्त, साधुत्व के योग्य, तेजस्वी, बलवान, अत्यन्त भाग्यवान, निपुण, धैर्यवान, कठिन समय में विजयी, किसी से पराजित न होने वाला, दुष्टों का दमन करने वाला, धर्मात्माओं का रक्षक और सत्य का पालन करने वाला वीर पुत्र उत्पन्न करती है।
Hearing this, every Kshatriya woman gives birth to a son who is knowledgeable, courageous, generous, ascetic, full of Brahmi beauty, capable of sainthood, bright, strong, very fortunate, expert, patient, victorious in difficult times, who is not defeated by anyone, suppresses the wicked, protector of righteous souls and a brave son of truth.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि विदुलापुत्रानुशासनसमाप्तौ षट्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें विदुलाके द्वारा पुत्रको दिये जानेवाले उपदेशका समाप्तिविषयक एक सौ छत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥