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mahabharat 5.136.12: (कुंती बोली -) हे श्रीकृष्ण! यद्यपि संजय का हृदय अत्यन्त दुर्बल था, तथापि विदुला के विचित्र अर्थ, शब्द और अक्षरों वाले वचन सुनकर उसका तमोगुणजनित भय और शोक नष्ट हो गया।   |   mahabharat अध्याय 5.136: विदुलाके उपदेशसे उसके पुत्रका युद्धके लिये उद्यत होना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 136: विदुलाके उपदेशसे उसके पुत्रका युद्धके लिये उद्यत होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.136.12 
यस्यास्त्वीदृशकं वाक्यं श्रुत्वापि स्वल्पचेतस:।
तमस्त्वपागमत् तस्य सुचित्रार्थपदाक्षरम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
(कुंती बोली -) हे श्रीकृष्ण! यद्यपि संजय का हृदय अत्यन्त दुर्बल था, तथापि विदुला के विचित्र अर्थ, शब्द और अक्षरों वाले वचन सुनकर उसका तमोगुणजनित भय और शोक नष्ट हो गया।
 
(Kunti said -) Shri Krishna! Although Sanjaya's heart was very weak, yet on hearing Vidula's words with strange meaning, words and syllables, his fear and sorrow born of the Tamoguna (darkness) vanished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)