श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश  »  श्लोक 6-8
 
 
श्लोक  5.135.6-8 
स समीक्ष्यक्रमोपेतो मुख्य: कालोऽयमागत:।
अस्मिंश्चेदागते काले कार्यं न प्रतिपद्यसे॥ ६॥
असम्भावितरूपस्त्वमानृशंस्यं करिष्यसि।
तं त्वामयशसा स्पृष्टं न ब्रूयां यदि संजय॥ ७॥
खरीवात्सल्यमाहुस्तन्नि:सामर्थ्यमहेतुकम्।
सद्भिर्विगर्हितं मार्गं त्यज मूर्खनिषेवितम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह तुम्हारे लिए वीरता दिखाने का सर्वोत्तम समय है। यदि तुम ऐसे समय में भी अपने कर्तव्य का पालन नहीं करोगे और अपनी अपेक्षा के विपरीत आचरण करके शत्रुओं के प्रति क्रूरतापूर्ण व्यवहार नहीं करोगे, तो तुम्हारी अपकीर्ति सर्वत्र फैल जाएगी। संजय! यदि मैं ऐसे अवसर पर भी तुमसे कुछ न कहूँ, तो मेरा स्नेह गधे के स्नेह के समान शक्तिहीन और व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए हे पुत्र! उस मार्ग को त्याग दो जिसकी निंदा पुण्यात्मा भी करते हैं और जिसका अनुसरण केवल मूर्ख लोग ही करते हैं।
 
This is the prime time for you to display your valour. If you do not perform your duty even at such a time and do not behave cruelly towards your enemies by showing a nature contrary to what was expected of you, then your infamy will spread everywhere. Sanjay! If I do not say anything to you even at such an occasion, then my affection will be as powerless and futile as the affection of a donkey. Therefore, son! Leave the path which is criticised by the virtuous and which is followed only by foolish people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)