श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.135.39 
स्खलितार्थं पुनस्तात संत्यजन्ति च बान्धवा:।
अप्यस्मिन् नाश्वसन्ते च जुगुप्सन्ते च तादृशम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इसके विपरीत, जिसका धन नष्ट हो गया है, उसके मित्र और सम्बन्धी उसे त्याग देते हैं, उस पर विश्वास नहीं करते और उसके जैसे लोगों की निन्दा करते रहते हैं ॥39॥
 
On the contrary, the friends and relatives of a person whose wealth has been destroyed abandon him. They do not trust him and keep criticizing people like him. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)