निर्वादादास्पदं लब्ध्वा धनवृद्धिर्भविष्यति।
धनवन्तं हि मित्राणि भजन्ते चाश्रयन्ति च॥ ३८॥
अनुवाद
इस प्रकार शत्रु को शान्त करने से मनुष्य निर्भय शरणागत को प्राप्त होता है। उसे प्राप्त करने पर युद्ध आदि में न फँसने से धन की वृद्धि होती है। तब उस धनवान राजा के बहुत से मित्र उसकी शरण में आकर उसकी सेवा करते हैं॥ 38॥
By pacifying the enemy in this way, one obtains a fearless refuge. On obtaining him, one's wealth increases as one does not get entangled in wars etc. Then many friends of the wealthy king take shelter and serve him.॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥