Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.135.38: इस प्रकार शत्रु को शान्त करने से मनुष्य निर्भय शरणागत को प्राप्त होता है। उसे प्राप्त करने पर युद्ध आदि में न फँसने से धन की वृद्धि होती है। तब उस धनवान राजा के बहुत से मित्र उसकी शरण में आकर उसकी सेवा करते हैं॥ 38॥   |   mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.135.38 
निर्वादादास्पदं लब्ध्वा धनवृद्धिर्भविष्यति।
धनवन्तं हि मित्राणि भजन्ते चाश्रयन्ति च॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शत्रु को शान्त करने से मनुष्य निर्भय शरणागत को प्राप्त होता है। उसे प्राप्त करने पर युद्ध आदि में न फँसने से धन की वृद्धि होती है। तब उस धनवान राजा के बहुत से मित्र उसकी शरण में आकर उसकी सेवा करते हैं॥ 38॥
 
By pacifying the enemy in this way, one obtains a fearless refuge. On obtaining him, one's wealth increases as one does not get entangled in wars etc. Then many friends of the wealthy king take shelter and serve him.॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)