श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.135.37 
तं विदित्वा पराक्रान्तं वशे न कुरुते यदि।
निर्वादैर्निर्वदेदेनमन्ततस्तद् भविष्यति॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
यदि तुम अपने शत्रु को अत्यन्त बलवान जानकर उसे वश में करने में असमर्थ हो, तो विश्वसनीय दूतों के द्वारा साम और दान की नीति अपनाकर उसे अपने अनुकूल बना लो (ताकि वह आक्रमण न करे और शान्त रहे)। ऐसा करने से अन्ततः तुम उसे वश में कर लोगे॥ 37॥
 
If you are unable to subdue your enemy by knowing that he is very powerful, then you should make him favorable by using the policy of Sama and Daan (conciliation) through reliable messengers (so that he does not attack and remains calm). By doing this, you will eventually subdue him.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)