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mahabharat 5.135.3: आश्चर्य है कि आप मुझ अपने इकलौते पुत्र से ऐसी कठोर बातें कहते हैं! यदि आपको सारा संसार भी मिल जाए, तो भी मुझे न देखने पर आपको क्या सुख मिलेगा?॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.135.3 
ईदृशं वचनं ब्रूयाद् भवती पुत्रमेकजम्।
किं नु ते मामपश्यन्त्या: पृथिव्या अपि सर्वया॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आश्चर्य है कि आप मुझ अपने इकलौते पुत्र से ऐसी कठोर बातें कहते हैं! यदि आपको सारा संसार भी मिल जाए, तो भी मुझे न देखने पर आपको क्या सुख मिलेगा?॥3॥
 
It is surprising that you say such cruel things to me, your only son! Even if you get the whole world, what happiness will you get from it if you do not see me?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)