यस्य प्रागेव विदिता सर्वार्थानामनित्यता॥ २८॥
नुदेद् वृद्धॺसमृद्धी स प्रतिकूले नृपात्मज।
अनुवाद
राजकुमार! जो बुद्धिमान मनुष्य सब वस्तुओं की अनित्यता का पूर्व ज्ञान रखता है, वह अपने शत्रु की प्रगति और अपने पतन से होने वाले दुःख का चिन्तन करके, अपने पतन से होने वाले दुःख को दूर कर सकता है।
Prince! A wise man who has prior knowledge of the impermanence of all things can, by contemplating upon the progress of his enemy and the suffering caused by his own decline, ward off the suffering caused by his own self-degradation. 28 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥