Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.135.26: पिताश्री! सभी कर्मों के फल सदैव अनित्य होते हैं - कभी फल देते हैं और कभी नहीं देते। इस अनित्यता को जानते हुए भी बुद्धिमान पुरुष कर्म करते हैं और कभी असफल होते हैं, कभी सफल होते हैं॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पिताश्री! सभी कर्मों के फल सदैव अनित्य होते हैं - कभी फल देते हैं और कभी नहीं देते। इस अनित्यता को जानते हुए भी बुद्धिमान पुरुष कर्म करते हैं और कभी असफल होते हैं, कभी सफल होते हैं॥ 26॥
Father! There is always impermanence in the results of all actions - sometimes they yield results and sometimes they do not. Even after knowing this impermanence, wise men perform actions and sometimes they fail, and sometimes they succeed.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥