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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश
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श्लोक 24
श्लोक
5.135.24
तन्मे परिणतप्रज्ञे सम्यक् प्रब्रूहि पृच्छते।
करिष्यामि हि तत् सर्वं यथावदनुशासनम्॥ २४॥
अनुवाद
हे प्रौढ़ बुद्धि की माता! कृपया मेरे प्रश्न का कोई अच्छा समाधान बताइए। मैं आपकी सभी आज्ञाओं का यथायोग्य पालन करूँगा। ॥24॥
Mother of mature wisdom! Please tell me a good solution for my question. I will follow all your instructions in the proper manner. ॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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