श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.135.19 
पुत्र उवाच
नेयं मतिस्त्वया वाच्या मात: पुत्रे विशेषत:।
कारुण्यमेवात्र पश्य भूत्वेह जडमूकवत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पुत्र ने कहा- माता! आपको मुख से ऐसा विचार प्रकट नहीं करना चाहिए, इसलिए आप जड़ और मूक होकर मुझ पुत्र की ओर विशेष करुण दृष्टि से देखें। 19॥
 
The son said- Mother! You should not express such thoughts with your mouth, therefore, being inert and mute, you should look at me, your son, with a particularly compassionate gaze. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)