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mahabharat 5.135.18: प्रियतम के अभाव में मनुष्य सुन्दर नहीं रहता। जैसे गंगा नदी सागर में विलीन हो जाती है, वैसे ही प्रियतम से विहीन मनुष्य भी निश्चय ही विलीन हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.135.18 
प्रियाभावाच्च पुरुषो नैव प्राप्नोति शोभनम्।
ध्रुवं चाभावमभ्येति गत्वा गङ्गेव सागरम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
प्रियतम के अभाव में मनुष्य सुन्दर नहीं रहता। जैसे गंगा नदी सागर में विलीन हो जाती है, वैसे ही प्रियतम से विहीन मनुष्य भी निश्चय ही विलीन हो जाता है।
 
A man is not beautiful in the absence of his beloved. Just like the river Ganga vanishes into the ocean, in the same way a man who is deprived of his beloved also surely vanishes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)