Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.135.15-16: अतः अनेक बार पराजित और क्रोध से जलते हुए महाबली क्षत्रिय को विजय की इच्छा से शत्रुओं पर आक्रमण करना चाहिए। तब उसे शरीर त्यागकर या शत्रु का वध करके ही शांति प्राप्त हो सकती है। इसके अतिरिक्त उसे अन्य किसी उपाय से शांति कैसे प्राप्त हो सकती है?॥15-16॥ | mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः अनेक बार पराजित और क्रोध से जलते हुए महाबली क्षत्रिय को विजय की इच्छा से शत्रुओं पर आक्रमण करना चाहिए। तब उसे शरीर त्यागकर या शत्रु का वध करके ही शांति प्राप्त हो सकती है। इसके अतिरिक्त उसे अन्य किसी उपाय से शांति कैसे प्राप्त हो सकती है?॥15-16॥
Therefore, a strong-willed Kshatriya who has been defeated many times and is burning with anger, must attack his enemies with the desire to win. Then he can attain peace only by sacrificing his body or by killing his enemy. How can he attain peace in any other way than this?॥15-16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥