Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.135.11-13h: बेटा! जो मनुष्य विनयहीन और अशिक्षित पौत्र से सुख प्राप्त करता है और जो परिश्रमी, कुसंस्कारी और कुबुद्धि वाला पुत्र है, उसमें सुख पाता है, उसका वंश-उत्पत्ति करना व्यर्थ है; क्योंकि वे अयोग्य पुत्र और पौत्र तो पहले तो कोई कर्म ही नहीं करते, और यदि करते भी हैं, तो निन्दित कर्म ही करते हैं। इसी कारण वे नीच मनुष्य न इस लोक में सुख पाते हैं, न परलोक में॥ 11-12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो ह्येवमविनीतेन रमते पुत्र नप्तृणा।
अनुत्थानवता चापि दुर्विनीतेन दुर्धिया॥ ११॥
रमते यस्तु पुत्रेण मोघं तस्य प्रजाफलम्।
अकुर्वन्तो हि कर्माणि कुर्वन्तो निन्दितानि च॥ १२॥
सुखं नैवेह नामुत्र लभन्ते पुरुषाधमा:।
अनुवाद
बेटा! जो मनुष्य विनयहीन और अशिक्षित पौत्र से सुख प्राप्त करता है और जो परिश्रमी, कुसंस्कारी और कुबुद्धि वाला पुत्र है, उसमें सुख पाता है, उसका वंश-उत्पत्ति करना व्यर्थ है; क्योंकि वे अयोग्य पुत्र और पौत्र तो पहले तो कोई कर्म ही नहीं करते, और यदि करते भी हैं, तो निन्दित कर्म ही करते हैं। इसी कारण वे नीच मनुष्य न इस लोक में सुख पाते हैं, न परलोक में॥ 11-12 1/2॥
Son! One who derives pleasure from a humility-less and uneducated grandson and finds pleasure in a son who is industrious, ill-mannered and of bad intellect, his procreation is futile; because those unworthy sons and grandsons first of all do not perform any work and if they do, they only perform condemnable deeds. Due to this, those wretched men find happiness neither in this world nor in the next.॥ 11-12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥