Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.135.10: धर्म, अर्थ और गुणों से युक्त, देवलोक तथा मनुष्यलोक में उपयोगी तथा सत्पुरुषों द्वारा किए जाने वाले शुभ कर्मों को करके ही तुम मुझे प्रिय हो सकते हो। इसके विपरीत, बुरे कर्मों को करके तुम मुझे किसी भी प्रकार प्रिय नहीं हो सकते ॥10॥ | mahabharat अध्याय 5.135: विदुला और उसके पुत्रका संवाद—विदुलाके द्वारा कार्यमें सफलता प्राप्त करने तथा शत्रुवशीकरणके उपायोंका निर्देश । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म, अर्थ और गुणों से युक्त, देवलोक तथा मनुष्यलोक में उपयोगी तथा सत्पुरुषों द्वारा किए जाने वाले शुभ कर्मों को करके ही तुम मुझे प्रिय हो सकते हो। इसके विपरीत, बुरे कर्मों को करके तुम मुझे किसी भी प्रकार प्रिय नहीं हो सकते ॥10॥
You can become dear to me only by doing good deeds which are endowed with Dharma, Artha and virtues, useful in the world of gods as well as the world of humans, and which are practised by good men. On the contrary, you cannot become dear to me in any way by doing bad deeds. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥