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mahabharat 5.134.6: उन सभी से मित्रता करके तुम अपने शत्रु सिन्धुराज पर समय आने वाली विपत्ति की प्रतीक्षा करो और पर्वतों की दुर्गम गुफाओं में विचरण करते रहो, क्योंकि यह सिन्धुराज अमर नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.134.6 
तै: कृत्वा सह संघातं गिरिदुर्गालयं चर।
काले व्यसनमाकाङ्क्षन् नैवायमजरामर:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन सभी से मित्रता करके तुम अपने शत्रु सिन्धुराज पर समय आने वाली विपत्ति की प्रतीक्षा करो और पर्वतों की दुर्गम गुफाओं में विचरण करते रहो, क्योंकि यह सिन्धुराज अमर नहीं है।
 
Having made friendship with all of them, you should wait for the calamity to befall your enemy Sindhuraj in due course and keep roaming in the inaccessible caves of the mountains, because this Sindhuraj is not immortal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)