Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.134.41: क्षत्रिय चाहे असहाय हो या न हो, वह अन्य जातियों के लोगों को वश में रखता है और सभी पापियों को दण्ड देता है तथा जीवन भर उद्यमी बना रहता है ॥41॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.134.41 
नियच्छन्नितरान् वर्णान् विनिघ्नन् सर्वदुष्कृत:।
ससहायोऽसहायो वा यावज्जीवं तथा भवेत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय चाहे असहाय हो या न हो, वह अन्य जातियों के लोगों को वश में रखता है और सभी पापियों को दण्ड देता है तथा जीवन भर उद्यमी बना रहता है ॥41॥
 
Whether a Kshatriya is helpless or not, he keeps people of other castes under control and punishes all the sinners and remains as enterprising throughout his life. ॥ 41॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि विदुलापुत्रानुशासने चतुस्त्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें विदुलाका अपने पुत्रको उपदेशविषयक एक सौ चौंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)