Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.134.36-37: मैं उस सनातन एवं उत्तम क्षत्रिय हृदय को जानता हूँ जिसे स्वयं विधाता ने रचा है, जिसका वर्णन प्राचीनतम एवं अति प्राचीनतम पुरुषों ने किया है, जिसका वर्णन भविष्य एवं भविष्य में आने वाले पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा किया जाएगा तथा जो सनातन एवं अविनाशी है ॥36-37॥ | mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं उस सनातन एवं उत्तम क्षत्रिय हृदय को जानता हूँ जिसे स्वयं विधाता ने रचा है, जिसका वर्णन प्राचीनतम एवं अति प्राचीनतम पुरुषों ने किया है, जिसका वर्णन भविष्य एवं भविष्य में आने वाले पुण्यात्मा पुरुषों द्वारा किया जाएगा तथा जो सनातन एवं अविनाशी है ॥36-37॥
I know that eternal and excellent Kshatriya heart which has been created by the Creator himself, which has been described by the ancient and most ancient men, which will be described by the future and the future virtuous men and which is eternal and indestructible. ॥36-37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥