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mahabharat 5.134.34-35h: यदि मैं देखूँ कि आप शत्रु से मीठी-मीठी बातें कर रहे हैं और उसका अनुसरण कर रहे हैं, तो मेरे हृदय में क्या शांति मिलेगी? ॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  5.134.34-35h 
यदि त्वामनुपश्यामि परस्य प्रियवादिनम्॥ ३४॥
पृष्ठतोऽनुव्रजन्तं वा का शान्तिर्हृदयस्य मे।
 
 
अनुवाद
यदि मैं देखूँ कि आप शत्रु से मीठी-मीठी बातें कर रहे हैं और उसका अनुसरण कर रहे हैं, तो मेरे हृदय में क्या शांति मिलेगी? ॥34 1/2॥
 
If I see that you are talking sweetly to the enemy and following him, what peace will I find in my heart? ॥ 34 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)