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mahabharat 5.134.30: राजन! आप युद्ध में शत्रुओं का संहार करके अपने धर्म का पालन करते हैं। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाले आपके वीर पुत्र को मैं अत्यंत दरिद्र या कायर नहीं देखूँ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.134.30 
जहि शत्रून् रणे राजन् स्वधर्ममनुपालय।
मा त्वादृशं सुकृपणं शत्रूणां भयवर्धनम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
राजन! आप युद्ध में शत्रुओं का संहार करके अपने धर्म का पालन करते हैं। शत्रुओं का भय बढ़ाने वाले आपके वीर पुत्र को मैं अत्यंत दरिद्र या कायर नहीं देखूँ॥30॥
 
Rajan! You kill your enemies in war and follow your religion. I should not see your brave son, who increases the fear of enemies, as very poor or cowardly. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)