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mahabharat 5.134.3: जैसे मरते हुए मनुष्य पर कोई औषधि काम नहीं करती, वैसे ही ये तर्कपूर्ण, प्रभावकारी और अर्थपूर्ण वचन भी तुम्हारे हृदय तक नहीं पहुँच पाते (यह बड़े दुःख की बात है)।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.134.3 
अर्थवन्त्युपपन्नानि वाक्यानि गुणवन्ति च।
नैव सम्प्राप्नुवन्ति त्वां मुमूर्षुमिव भेषजम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
जैसे मरते हुए मनुष्य पर कोई औषधि काम नहीं करती, वैसे ही ये तर्कपूर्ण, प्रभावकारी और अर्थपूर्ण वचन भी तुम्हारे हृदय तक नहीं पहुँच पाते (यह बड़े दुःख की बात है)।॥3॥
 
Just as no medicine works for a dying man, similarly these logical, effective and meaningful words also fail to reach your heart (this is a matter of great sadness).॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)